नई दिल्ली, भारत – मार्च माह में भारत की एलपीजी (LPG) की खपत में 12.8 प्रतिशत की उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। इस वर्ष मार्च में 2.379 मिलियन टन एलपीजी का उपभोग हुआ, जो पिछले साल इसी अवधि में 2.729 मिलियन टन था। इस प्रकार एलपीजी की खपत में लगभग तेरह प्रतिशत की कमी आई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह गिरावट मुख्यतः पश्चिम एशिया में जारी तनावपूर्ण स्थिति का परिणाम है, जो वैश्विक ऊर्जा बाजारों को प्रभावित कर रही है। इस क्षेत्र से कच्चे तेल तथा गैस की आपूर्ति में व्यवधान के कारण भारत में एलपीजी की आपूर्ति और खपत दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
एलपीजी, जो घरेलू एवं व्यावसायिक उपयोग में ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, विशेष रूप से ग्रामीण और शहरी परिवारों के लिए घरेलू रसोई गैस के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गिरती खपत का मतलब न केवल उपयोगकर्ताओं की संख्या या पैटर्न में बदलाव हो सकता है, बल्कि आपूर्ति श्रृंखला में समस्याएं या कीमतों में उछाल भी इस पर असर डालते हैं।
सरकारी अधिकारियों ने बताया कि एलपीजी की कीमतों में वृद्धि और उपलब्धता में कमी भी इस खपत में गिरावट के कारण हो सकती है। इसके अलावा, उपभोक्ता आर्थिक माहौल के चलते ऊर्जा की आवश्यकता और खर्च में कटौती कर रहे हैं।
वाणिज्यिक और औद्योगिक सेक्टर में लाभ और उत्पादन में बदलाव भी खपत में उतार-चढ़ाव का एक कारण माना जा रहा है। सरकार इस स्थिति पर नजर रखे हुए है और आवश्यकतानुसार उपाय कर सकती है ताकि एलपीजी की आपूर्ति और कीमतों में स्थिरता लाई जा सके।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया की स्थिति में सुधार होता है और वैश्विक बाजार में स्थिरता आती है, तो एलपीजी की खपत फिर से बढ़ सकती है। फिलहाल, ऊर्जा क्षेत्र में चुनौतियां बनी हुई हैं, जिनका प्रभाव आम लोगों और उद्योगों दोनों पर पड़ रहा है।
