नई दिल्ली, भारत – एबी, एक स्वास्थ्य जागरूक महिला, ने हाल ही में अपनी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए चैटबॉट से परामर्श लेने का निर्णय लिया। इस प्रक्रिया में उन्हें मिले परिणाम काफी मिश्रित और निराशाजनक रहे हैं। स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और चैटबॉट तकनीक का तेजी से विकास हो रहा है, लेकिन एबी के अनुभव से यह स्पष्ट होता है कि अभी भी इस प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है।
एबी का कहना है कि शुरूआत में चैटबॉट से मिलने वाली जानकारी तटस्थ और उपयोगी प्रतीत हुई, परन्तु समय के साथ कई बार उसे गलत या अपूर्ण सलाह भी मिली। ‘‘जब मैंने अपनी आम स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में पूछा, तो कुछ सुझाव सही थे, लेकिन कुछ बार ऐसी सलाह भी मिली जो मेरे डॉक्टर की सलाह के अनुरूप नहीं थी।’’ उसने बताया।
विश्लेषकों का मानना है कि स्वास्थ्य चैटबॉट्स को हजारों चिकित्सा डेटा के आधार पर प्रशिक्षित किया जाता है, लेकिन फिर भी वे मरीज की जटिल स्वास्थ्य स्थिति को पूर्ण रूप से समझने में सक्षम नहीं होते। इसके अलावा, नैदानिक संदर्भ और व्यक्तिगत इतिहास की कमी के कारण ये बोट सीमित जानकारी प्रदान कर पाते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जोर देते हुए कहा कि डिजिटल टूल जैसे चैटबॉट्स महज प्राथमिक जानकारी या मार्गदर्शन के लिए उपयोगी हो सकते हैं, लेकिन इलाज या गंभीर स्वास्थ्य निर्णय लेंने से पहले हमेशा प्रमाणित चिकित्सक से परामर्श करना आवश्यक है।
ऐसे में, उपयोगकर्ताओं को सावधानी बरतनी चाहिए और चैटबॉट्स से प्राप्त जानकारी को पूरी तरह से भरोसेमंद नहीं मानना चाहिए। एबी के अनुभव ने भी इस बात को रेखांकित किया है कि यह तकनीक अभी भी पूरी तरह परिपक्व नहीं हुई है और इसे बेहतर बनाने के लिए निरंतर सुधार करने की आवश्यकता है।
स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक का समावेश आवश्यक और फायदेमंद हो सकता है, लेकिन उसकी सीमाओं को समझना सर्वोपरि है। भविष्य में बेहतर एल्गोरिदम और व्यापक चिकित्सकीय डेटा के उपयोग से चैटबॉट्स और अधिक सटीक और उपयोगी बन सकते हैं। तब तक, डॉक्टर की सलाह को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
