नई दिल्ली, भारत: अडेनोमायोसिस एक ऐसी स्थिति है जो महिलाओं में अपेक्षाकृत सामान्य है, लेकिन इसके बारे में जागरूकता और सही निदान की कमी बनी हुई है। कई महिलाओं को इस स्थिति का पता केवल वर्षों तक लक्षणों के साथ रहने के बाद ही चलता है। इसके कारण दर्द और असुविधा से अनेक महिलाओं का जीवन प्रभावित हो रहा है, जबकि समय रहते सही पहचान और उपचार संभव है।
अडेनोमायोसिस क्या है? यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें गर्भाशय की आंतरिक परत (एन्डोमेट्रियम) गर्भाशय की मांसपेशीय परत में जाकर बस जाती है। इससे मासिक धर्म के दौरान असाधारण दर्द, भारी रक्तस्राव और अन्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं। इसके लक्षण अक्सर सामान्य मासिक धर्म की तकलीफों से मिलते जुलते हैं, इसी वजह से इसे पहचानना मुश्किल होता है।
डॉक्टर्स के अनुसार, अडेनोमायोसिस का सटीक कारण अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन हार्मोनल असंतुलन, गर्भाशय में चोट या सर्जरी इसके संभावित कारण हो सकते हैं। यह स्थिति अधिकतर ३० से ५० वर्ष की उम्र की महिलाओं में देखी जाती है, खासकर जिनका प्रसव हो चुका हो।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस रोग के प्रति जागरूकता की कमी के कारण कई महिलाएं वर्षों तक अपने लक्षणों को नजरअंदाज करती हैं। कई बार इन्हें सामान्य मासिक धर्म दर्द समझकर घरेलू इलाज या बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयां लेती रहती हैं, जिससे स्थिति गंभीर हो जाती है।
निदान के लिए डॉक्टर सामान्यतः अल्ट्रासाउंड या एम.आर.आई जैसे परीक्षण करते हैं। सही निदान के बाद ही उचित उपचार शुरू किया जा सकता है, जो दवाइयों से लेकर कुछ मामलों में सर्जरी तक हो सकता है। इसके अलावा, जीवनशैली में बदलाव और दर्द निवारक दवाइयों से भी राहत मिल सकती है।
महिलाओं को चाहिए कि वे मासिक धर्म के वक्त असामान्य दर्द या अत्यधिक रक्तस्राव को कभी भी सामान्य न समझें। यदि इन लक्षणों के साथ नियमित जीवन प्रभावित हो रहा हो तो तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें। समय रहते निदान और उपचार से वे इस रोग की जटिलताओं से बच सकती हैं।
अंत में, स्वास्थ्य विशेषज्ञ और सार्वजनिक स्वास्थ्य संगठनों को भी जरूरत है कि वे अडेनोमायोसिस के प्रति जागरूकता अभियान चलाएं ताकि महिलाएं समय पर उचित देखभाल प्राप्त कर सकें। इस प्रकार कई महिलाओं का जीवन दर्द रहित और स्वस्थ बनाया जा सकता है।
