‘Girls are confusing’: Milind Soman on why feeling lost at 18 is a natural part of growing up

अट्ठारह की उम्र में खो जाना स्वाभाविक है: मिलिंद सोमन की भावनाओं पर एक विचार

मुंबई, महाराष्ट्र

अभिनेता और फिटनेस आइकन मिलिंद सोमन ने हाल ही में एक इंटरव्यू में 18 वर्ष की उम्र में महसूस होने वाले भ्रम और असमंजस के बारे में खुलकर अपनी बात कही। उन्होंने बताया कि जीवन के इस पड़ाव पर खुद को खोया हुआ महसूस करना पूरी तरह से सामान्य है और यह समय स्वयं को समझने और खोजने का होता है।

मिलिंद सोमन ने कहा, “जब कोई प्रौढ़ता की दहलीज पर होता है, तो उसके मन में अनेक सवाल आते हैं, विशेषकर लड़कियों को लेकर। यह भ्रम की स्थिति पूरी तरह स्वाभाविक है क्योंकि उस उम्र में व्यक्ति अपने अस्तित्व, पहचान और भावनाओं को लेकर अनिश्चित रहता है।” उन्होने यह भी स्पष्ट किया कि यह भ्रम जीवन की प्राकृतिक प्रक्रिया का हिस्सा है, जिससे हर किसी को गुजरना पड़ता है।

उन्होंने आगे कहा कि वे खुद भी 18 वर्ष की उम्र में कई बार अटपटे और असमंजस की स्थिति में फंसे थे। इस समय में मित्र और परिवार का सहारा बहुत महत्वपूर्ण होता है ताकि युवा सही मार्गदर्शन पा सकें और अपनी भावनाओं को समझ सकें।

मिलिंद ने युवाओं को यह सलाह दी कि वे इस समय खुद पर दबाव न डालें और अपने आप को समझने के लिए पर्याप्त समय दें। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस उम्र में की गई गलतियां और अनुभव भविष्य के लिए सीख होती हैं, जो व्यक्ति को अधिक परिपक्व बनाती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार भी, अट्ठारह वर्ष की उम्र वह मुकाम होता है जब शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक बदलावों का दौर शुरू होता है, जिससे कई बार भ्रम और उलझनें जन्म लेती हैं। इसलिए युवाओं को इस अवस्था में धैर्य रखने और अपने नजदीकी लोगों से सलाह लेने की आवश्यकता होती है।

मिलिंद सोमन का यह विचार युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य और उनके संचार को एक नई दिशा देने का प्रयास माना जा रहा है। इस विषय पर जागरूकता बढ़ाने और समर्थन देने की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही है ताकि युवा इस परिवर्तनशील दौर से बेहतर तरीके से गुजर सकें।

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