नई दिल्ली, भारत – हालिया स्वास्थ्य शोधों के आधार पर विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि आपका व्यायाम करने का समय आपके शरीर की जैविक घड़ी या बॉडी क्लॉक के अनुरूप होना चाहिए। यह कदम न केवल आपकी फिटनेस की गुणवत्ता को बेहतर बनाएगा बल्कि स्वास्थ्य में कई प्रकार के लाभ भी प्रदान कर सकता है।
शरीर की जैविक घड़ी हमारे शरीर के विभिन्न जैविक क्रियाकलापों को नियंत्रित करती है, जैसे कि नींद, जागना, हार्मोन का स्राव, पाचन और शारीरिक गतिविधियों की ऊर्जा। विशेषज्ञों का मानना है कि सही समय पर व्यायाम करने से शरीर की कार्यक्षमता बेहतर होती है और थकान कम महसूस होती है।
स्वास्थ्य शोधकर्ताओं ने कई अध्ययनों में यह पाया है कि सुबह या शाम के वर्कआउट का प्रभाव व्यक्ति के क्रोनोटाइप (शारीरिक समयसारणी के अनुसार) पर निर्भर करता है। ‘सवेरा वाला’ व्यक्ति, जिसे ‘मॉर्निंग पर्सन’ कहा जाता है, उनके लिए सुबह की कसरत अधिक लाभकारी होती है, क्योंकि उनकी ऊर्जा और सतर्कता इस वक्त चरम पर होती है। वहीं ‘नाइट आवर’ प्रकार के लोगों के लिए शाम को व्यायाम करना बेहतर होता है।
विशेषज्ञों का यह भी मत है कि शरीर की जैविक घड़ी के अनुसार व्यायाम करने से मेटाबॉलिज्म अधिक प्रभावशील होता है, जिससे वजन नियंत्रण और कार्डियोवैस्कुलर स्वास्थ्य में सुधार होता है। उचित समय पर व्यायाम करने से तनाव भी कम होता है तथा नींद की गुणवत्ता में वृद्धि होती है।
प्रतिदिन एक ही समय पर व्यायाम करने की आदत विकसित करने से शरीर का जैविक तंत्र इस लय के अनुकूल हो जाता है, जिससे मांसपेशियों की मजबूती और सहनशक्ति में वृध्दि होती है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि स्वास्थ्य को देखते हुए व्यायाम की तीव्रता और प्रकार निर्धारित करें, और शरीर की सुनें।
अधिकतर विशेषज्ञ इस बात पर सहमत हैं कि व्यायाम को दिन के ऐसे समय में शामिल किया जाना चाहिए, जब व्यक्ति को सबसे अधिक ऊर्जा और प्रेरणा महसूस हो। यह न केवल स्वास्थ्य के लिए हितकारी है, बल्कि दैनिक दिनचर्या में भी संतुलन बनाता है।
आखिरकार, यह बताया गया है कि समय के अनुसार व्यायाम करने से शरीर की जैविक घड़ी से तालमेल बेहतर होता है, जो हमारी समग्र स्वास्थ्य स्थिति के लिए लंबे समय में अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार लोगों को अपनी ‘बॉडी क्लॉक’ समझकर व्यायाम की योजना बनाने की प्रेरणा दे रहे हैं।
