नई दिल्ली, भारत – दुनिया भर में बढ़ती महंगाई के बीच, पिछले साल 20 से 34 वर्ष की आयु वाले पुरुषों की संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई जिन्होंने अभी भी अपने माता-पिता के घर में रहना जारी रखा है। यह आंकड़ा 2007 के बाद का उच्चतम स्तर माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक दबाव और उच्च जीवन यापन की लागत इस प्रवृत्ति के मुख्य कारण हैं।
देशभर में युवाओं के लिए स्वतंत्र रूप से रहने की बजाय परिवार के साथ रहना एक मजबूरी बनता जा रहा है। मकान किराए, दैनिक खर्च, और शिक्षा संबंधी ऋणों की भरपाई युवाओं के लिए बड़ी चुनौतियाँ बन गई हैं। इसके परिणामस्वरूप, अब कई युवा कामकाजी जीवन में पड़ने के बावजूद घर छोड़ने में संकोच कर रहे हैं।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष इस आयु वर्ग के 42 प्रतिशत पुरुष अपने माता-पिता के साथ रह रहे थे जो पिछले दस वर्षों में सबसे अधिक प्रतिशत है। यह प्रवृत्ति न केवल आर्थिक कारणों से है बल्कि सामाजिक प्रतिबंधों और सुरक्षा की भावना के कारण भी देखी जा रही है।
विशेषज्ञ कहते हैं कि मौजूदा आर्थिक हालात में युवाओं के लिए करियर में स्थिरता और आर्थिक स्वतंत्रता हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। “जीवन यापन की बढ़ती लागत और रोजगार की अनिश्चितता ने युवाओं की मानसिकता को प्रभावित किया है,” एक सामाजिक अर्थशास्त्री ने बताया।
सरकार ने कुछ उपाय किए हैं जैसे कि सस्ते आवास योजनाएं और युवाओं के लिए रोजगार सृजन कार्यक्रम, लेकिन उनका प्रभाव अभी पूरी तरह से दिख नहीं रहा है। आर्थिक सुधारों और सामाजिक बदलावों के बिना इस समस्या का स्थायी समाधान मुश्किल है।
इस बीच, कई परिवार इस स्थिति को समर्थन देने लग गए हैं जो उनके लिए आर्थिक और भावनात्मक तौर पर भी आरामदायक है। लेकिन यह भी चिंता का विषय है कि स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता के लिए युवाओं को मिलने वाला मौका सीमित हो रहा है।
इस समस्या पर व्यापक चर्चा और सक्रिय नीतिगत बदलाव की आवश्यकता है ताकि युवा अपनी क्षमता का पूरा उपयोग कर सकें और समाज में आत्मनिर्भर बन सकें।
